“आरक्षण” कैंसर से भी खतरनाक बीमारीः सुरजीत भल्ला

  • भारत में उदारवाद के भूत, वर्तमान और भविष्य पर आयोजित सम्मेलन में विशेषज्ञों ने व्यक्त किए उद्गार
  • ‘लिब्रलिज्म इन इंडियाः पास्ट, प्रज़ेंट एंड फ्यूचर’ पुस्तक का विमोचन

ऑक्सस इन्वेस्टमेंट्स के चेयरमैन व सेबी के सेंकेण्ड्री मार्केट एडवाइज़री कमेटी के पूर्व सदस्य सुरजीत भल्ला ने आरक्षण व्यवस्था को देश के स्वास्थ्य के लिए कैंसर से भी गंभीर बीमारी की संज्ञा दी है। सुरजीत के मुताबिक आरक्षण की व्यवस्था ने देश के साथ ही साथ आरक्षित वर्ग को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य वंचित तबके की हालत में सुधार लाना होता है जबकि आरक्षण ने वास्तविक वंचितों को हालत को और अधिक दयनीय बनाया है। वह सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) व फ्रेडरिक न्यूमॉन फाऊंडेशन (एफएनएफ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक राष्ट्र स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

रविवार को उदारवादी विचारक, लेखक व पत्रकार एस.वी. राजू की स्मृति में ‘लिब्रलिज्म़ इन इंडियाः पास्ट, प्रजेंट एंड फ्यूचर’ विषय पर एक राष्ट्र स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान ‘डिवैल्युएशन टू प्रॉसपेरिटी’ नामक पुस्तक के लेखक सुरजीत भल्ला ने मुस्लिमों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों व पिछड़े वर्ग की तमाम समस्याओं के लिए आरक्षण को दोषी ठहराया। इस दौरान ‘लिब्रलिज्म इन इंडियाः पास्ट, प्रजेंट एंड फ्यूचर’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। होटल क्लैरिजेज़ में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से बड़ी संख्या में उदारवादी अर्थशास्त्रियों व विचारकों ने हिस्सा लिया। ‘इवोल्यूशनः हिस्ट्री ऑफ इंडियन लिब्रल थॉट्स’, ‘एक्जीक्यूशनः फ्रॉम आइडिया टू प्रैक्टिस’ व ‘रिवोल्यूशनः द वे फॉर्वर्ड फॉर इंडियन लिब्रलाइजेशन’ नामक तीन प्रमुख सत्रों में विभाजित इस सम्मेलन में फॉर्च्यून इंडिया के हिंडोल सेनगुप्ता, इंडिकस के निदेशक लवीश भंडारी, पत्रकार सीता, एमफेसिस के संस्थापक जयतीर्थ राव, सीसीएस के प्रेसिडेंट डॉ. पार्थ जे शाह, लोकसत्ता पार्टी के संस्थापक जेपी नारायण, प्रॉक्टर एंड गैम्बल इंडिया के पूर्व सीईओ गुरचरन दास, लिबर्टी इंस्टिट्यूट के संस्थापक निदेशक बरुन मित्रा, अर्थशास्त्री अतानु डे, फर्स्ट पोस्ट व फोर्ब्स इंडिया के आर. जगन्नाथन, तक्षशिला इंस्टिट्यूट के संस्थापक नितिन पाई सहित अनेक अर्थशास्त्री, विचारक, चिंतक व विशेषज्ञ उपस्थित रहें।

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Publication: 
रोज़ाना खबर
Publication Date: 
21 November 2016